Sunday, June 4, 2017

तेरा दर्द

तेरा दर्द

तु मेरी जिंदगी के हर आखरी पन्ने पर है 
मैंने मौत भी माँगी तो तेरी आरजू से माँगी है 

तेरी चाहत मे कहीं मेरा दम निकल ना जाए 
अब तो तु आजा कहीं मेरी साँसे छिनली ना जाए 

हर वक़्त तेरे खयालो मे मैं खोया हुआ था 
मुझे नहीं पता मैं कब सोया हुआ था 

नींद कैसी होती है मैं ये भुल गया हूँ 
जबसे तु रूठी है मैं टूट गया हूँ 

अब तो तेरी ख़बर भी दूसरों से आती हैं 
जबसे तु गयी है  सिर्फ खयालो में आती हैं 
 सिर्फ खयालो में आती हैं 

लेख़क विरेन्द्र भारती 
मो. 8561887634 
 ई मेल. virendra.bharti@yahoo.in
                                                        

Tuesday, May 30, 2017

रिश्ता

रिश्ता कच्चे धागो की पतंगों की तरह होता है,
ना जाने कब किस्से बन जाता है
ना जाने कब टूट के अलग हो जाता  है | 

Sunday, May 28, 2017

वो अजनबी

बहुत  दिनों  के  बाद  आज  फिर  सफर  का  मजा आया ।
आज  फिर  सफर  में   एक हमसफर  ऐसा  पाया ।
जिसकी  तारीफ  में  बहुत  कुछ  लिखने का  दिल  किया ।
पता नहीं  क्यों  उससे  बार- बार मिलने  का  दिल  किया ।।

वो अजनबी  बस  कुछ  पल  में  ही  दिल  में  घर  कर गई ।
वो  मुझे  कोटा  से  जयपुर  के  सफर  मिल  गई ।
उसे  देखकर  मेरी  गाड़ी  लोकल  बस  में  चढ़  गई।
फिर  क्या था  गाड़ी  सफर  पर  चल  गई।।

मैंने  उसको  देखा  उसने  मुझे  देखा
मैंने  उसको  देखा  उसने  मुझे  देखा
फिर वो मुस्कुराई  फिर  मैं  मुस्कुराया
और  फिर  नैन  मटक्का  हो  गया 

पता  नहीं  मेरी  कौनसी  आदत  उसे  पसंद  आ  गई ।
वो  अपनी  माँ  के  पास  से  उठकर  मेरे  पास  आ  गई।
शायद  जो  गुफ्तगू  मेरे  दिल  में  थी  वो  उसके  में  भी  चल गई 
पता  नहीं  क्या  था  वो  जो वो  ऐसा  कर  गई 

वो  चेहरा 
वो  आँखे 
वो मुस्कान 
वो शरारत

 बैठ के  पास  मेरे  वो  कयामत  ढ़ा  रहीं  थी।
वो खुद  भी  जल रहीं  थी  मुझे  भी  जला  रहीं  थी।।

ना  वो  खुद  को  रोक  पा  रहीं  थी ना  मै
जबकि  दोनों  जानते  थे  सफर  खत्म  हो  रहा है ।।

खत्म हो  गया  वो  सफर  देवली  ही
वो  उतर के  अपने रास्ते चल दि  और  मैं  अपने

एक दफा  फिर  लौट  कर  आई  वो  मिलने  मुझसे
उसने कहा  चलो  और मै  उसके  साथ  चल  दिया
फिर  ना  वो  बोल  पाई  ना  मैं

थोड़ी देर  युं  ही  एक  दूसरे को  देखते  रहे ।
फिर  वो  अपने  रास्ते  चल  दी  और  मैं  अपने






Friday, May 26, 2017

विदाई

ये दोस्ती के जमाने  याद  आयेंगे ।
ये दोस्त  पुराने  याद  आयेंगे ।
इन दोस्तों  की  बातें याद  आएगी ।
जब विदाई  हो जाएगी ।।

वो काॅलेज  याद  आयेंगी ।
वो  दोस्तों  की  शैतानिया याद आयेंगी ।
वो दोस्तों  का चिड़ाना  याद  आयेगा ।
जब विदाई  हो  जाएगी ।।

वो  साथ  घूमना  फिरना  याद  आयेगा ।
वो  कॉलेज  का झगड़ा  याद  आयेगा ।
वो  बात - बात  पर  दोस्तों  का  सताना  याद  आयेगा ।
जब विदाई हो जाएगी ।।

वो  मैडम की डाँट  याद आएगी ।
वो  सर  की  फटकार  याद आएगी ।
वो  सबका  प्यार  याद  आएगा ।
जब  विदाई हो जाएगी ।।

लेखक विरेन्द्र भारती
मो.  8561887634

Friday, May 19, 2017

घर राजस्थानी कविता

घर शब्द छ: घणो छोटो
अर्थ इको साँथरों मोटो।

इम रैव एक परिवार
बिना बिक सूनो संसार।

जठै सारा साँकला रैव
बठै सदा खुशहाली रैव।

ऊँ घर घर कहलावें
जठै सारा भाई मिल बैठ खावें।

जठै बड़ा रो मान होवें
ऊँ घर रो सदा सम्मान होवें।

जठै रैव समझदार नारी
बठै सारी खुशियाँ वारि।

जी घरकारों दिलड़ो मोटो होवें
बिक सामने स्वर्ग भी छोटो होवें।

मुसीबत भी बठै थर थर काँपें
जठै सारा दु:ख मिल बैठकर बाँटे।

जो घर ने घर समझे
घर री बात बाणें ना उपजें।

सारी आपदा सु यो बचावें
सर् रे ऊँपर छत कहलावें।

काचों होवे या पाकों
घर सिर्फ आपणों साँचों।।

लेखक विरेन्द्र भारती
   मो . 8561887634

Thursday, May 18, 2017

बारिश भी थम गई

आसमान में घटा छाई
घटा संग जब आँधी आई
आँधी संग जब बारिश कि पहली बुंद गिरी
उस बुंद ने मुझे कुछ यु छुआ
जैसे कोई चुभन ।।

उस चुभन में छुपी थी एक याद तुम्हारी
ताजा हो गए वो दिन
जब हुई मुलाकात हमारी
फिर याद आया वो मंजर
जब जुदा हुई तुम मुझसे ।।

तेरी उन यादों से जब आँख मेरी भर आई
आँखों से मोतियों की झड़ी बह आई
थम गई वो बारिश भी बहती हुई मेरी आँखों को देखकर
लेकिन तुझे याद ना मेरी आई ।।

खुशी हुई मुझे ये देखकर
शायद बारिश को भी मेरे दर्द से दर्द है
तभी तो वो बारिश भी थम गई
जब याद तेरी आई
जब याद तेरी आई ।।

लेखक विरेन्द्र भारती
 मो.  8561887634
22/06/2016
mad writer