Wednesday, February 8, 2017

सजा

अजीब सी चुभन अजीब अजीब  सी खुशी
जब डांटे  वो  शिक्षक ।
नफरत  उनके नियमो  से  मोहब्बत  हमारे  कामों  से ।
एक अजीब सी  भावना  आकर यूं  चली  जाती  है ।
फिर  थोड़ा  सा प्यार  भी  आता है ।
गुस्सा  बहुत  आता  है।  बहुत घर्णा  महसूस  होती  है।
आज फिर बचपन की तरह शिक्षक  से जुबान  लड़ाने  को मन  करता  है ।
पर अब  वक्त के  साथ मै  भी  बदल  चुका  हूँ ।
अपने अंदर के उस जानवर  को  खत्म  कर चुका  हूँ ।
आज उस शिक्षक की अहमियत  समझ आती है।
कई  दफा  मेरे  हर  शिक्षक  की तस्वीर  सामने  आती है ।
लेकिन  एक शिकायत  उनसे  आज  भी है।
क्यों  नही  समझा  उन्होंने  आज  तक  मुझे ?
अब  मुझे  बहुत  जल्दी  बहुत  कुछ  करना  है।
वक्त  कम है  मेरे  पास  जो  किस्से  अधूरे  छोड़  आया  उन्हें
अब  पूरा  करना  है।
मैं  फिर  एक  नया  रूप  लेके जी  रहा हूँ ।
कुछ  नया  करने  के  लिए ।
एक  दफा  फिर  इतिहास  रचने  के  लिए ।
बदलने  दो  मुझे यारों
एक  दफा  फिर  मत  रोको
जब मैं  गलत  था  तो  कोई  रोकने नहीं  आया ।
आज जब सहीं  करने  जा  रहा  हूँ
तो तुम  मेरी  रफ्तार  को  धीमी  कर रहें  हो।
क्यूं  फिर  मुझे  कभी -2 WANTED बनने  पर  मजबूर  हो
मुझे  अब उस  दुनिया  से  नफरत  है।
क्यों  उसके  किस्से  सुनाते  हो ।
रहने  दो  पहली बार  राह  पकड़ी  है भटकूँगा  नहीं ।

MAD WRITER VIRENDRA BHARTI
                8561887634


गजल एक भारती