Thursday, May 18, 2017

बारिश भी थम गई

आसमान में घटा छाई
घटा संग जब आँधी आई
आँधी संग जब बारिश कि पहली बुंद गिरी
उस बुंद ने मुझे कुछ यु छुआ
जैसे कोई चुभन ।।

उस चुभन में छुपी थी एक याद तुम्हारी
ताजा हो गए वो दिन
जब हुई मुलाकात हमारी
फिर याद आया वो मंजर
जब जुदा हुई तुम मुझसे ।।

तेरी उन यादों से जब आँख मेरी भर आई
आँखों से मोतियों की झड़ी बह आई
थम गई वो बारिश भी बहती हुई मेरी आँखों को देखकर
लेकिन तुझे याद ना मेरी आई ।।

खुशी हुई मुझे ये देखकर
शायद बारिश को भी मेरे दर्द से दर्द है
तभी तो वो बारिश भी थम गई
जब याद तेरी आई
जब याद तेरी आई ।।

लेखक विरेन्द्र भारती
 मो.  8561887634
22/06/2016
mad writer

गजल एक भारती